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वसीम जाफ़र ने उड़ाया ऑस्ट्रेलिया का मजाक, बोले- ‘गाबा-गाबा करने वालो, याद दिलाया था तुम्हें अब्बा..’

भारतीय टीम के पूर्व ओपनर खिलाड़ी वसीम जाफर को हार कोई जानता है, और इनके तुरंत जवाब देने की आदत से भी लोग बखूबी परिचित है। वे भारतीय टीम के आलोचकों को ट्विटर पर अक्सर जवाब देते रहते है। और अब एक बार फिर से उन्होंने ऑस्ट्रेलिया को धूल चटा दी।

उन्होंने एक वीडियो को रिट्विट किया जिसमे अजिंक्य राहणे और आर अश्विन 2021.22 में किए गए ऑस्ट्रेलिया दौरे की कहानी बता रहे है। इस दौरान भारतीय टीम के खिलाड़ियों को नस्लवादी जैसी टिप्पणियों का सामना करना पड़ा था।

इस दौरे पर विराट कोहली जैसे टीम के बहुत से बड़े नाम शामिल नहीं थे, और बहुत से खिलाड़ी चोटिल भी हो गए थे। इसके बावजूद भारत ने 2.1 से जीतकर ऑस्ट्रेलिया के मुंह पर तमाचा मारा था। इसके ऊपर वसीम जाफर ने तंज कसा है। उन्होंने लिखा, की गाबा गाबा करने वालो को अब्बा याद दिलाया था।

बता दें कि इस वीडियो में रविचंद्रन अश्विन ने नस्लवाद पर अधिक बातचीत करने के विचार का समर्थन किया है चाहे वह खेल के क्षेत्र में हो या किसी भी क्षेत्र में। वह यह भी महसूस करते हैं कि इस बारे में अच्छी बातचीत से जागरूकता पैदा की जा सकती है।

दोस्तो क्रिकेट को जेंटलमैन का गेम कहा जाता है। लेकिन अतीत में ऐसे कई उदाहरण देखने मिले जिसने नस्लवाद जैसे मुद्दों ने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया, इतना ही नहीं बल्कि ऐसी बातों ने क्रिकेट जैसे खेल को भी पूरी तरह बदनाम करके रख दिया है।

हालाकि इस दौरान कई लोग ऐसे भी थे जिन्हे ऐसी बातों के लिए सजा भी दी गई। अश्विन ने कहा, की मेरे हिसाब से इन सब मुद्दो पर बातचीत करना जरूरी है। चाहे वह क्रिकेट हो या अन्य कोई खेल, मुझे नहीं लगता की इसका किसी विशेष देश के लोगो के साथ कोई लेना देना है।

अश्विन ने कुछ ऐसी बातें भी बताई, जिनसे वर्तमान परिस्थितियों में सुधार हो सकता है। उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि इसका एकमात्र समाधान बेहतर बातचीत और जागरूकता है, बस इसके बारे में मंच पर या इस तरह के किसी कार्यक्रम में बात करने की जरूरत है।

विशेष रूप से, भारतीय तेज गेंदबाज मोहम्मद सिराज और जसप्रीत बुमराह को उनके 2021-22 ऑस्ट्रेलिया दौरे में उस प्रसिद्ध सिडनी टेस्ट के दौरान दर्शकों द्वारा नस्लीय दुर्व्यवहार किया गया था। अनुभवी स्पिनर को लगता है कि सिराज ने लोगों को इस बात से अवगत कराने का साहस दिखाया कि क्या हो रहा है।

आगे उन्होंने कहा, की मुझे लगता है, की ये एक निश्चित देश या निश्चित लोगो के साथ होने वाली बात नही है। हां लेकिन ये एक निश्चित स्थान और निश्चित मैदान पर हुआ है। लेकिन ये सिराज के लिए साहसी कदम था। की उन्होंने इस बारे में आवाज उठाई। ताकि कम से कम इस बारे में लोगो का एक बड़ा समूह जाने और उनके बगल में बैठे लोग आगे से अच्छा व्यवहार करे।

नस्लवाद एक ऐसी चीज है, जिसकी निंदा करनी चाहिए। लेकिन मैं आपको बताना चाहता हूं, की हर जगह लोग अलग अलग आधार पर लोगो को अलग अलग कर रहे है। जो जाहिर तौर पर बिल्कुल सही नही है।

इस बीच, उस समय विराट कोहली की गैरमौजूदगी में भारत के कप्तान अजिंक्य रहाणे ने भी सिराज के साथ हुई घटना और अंपायरों के साथ उनकी बातचीत को याद किया ताकि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके।

उस नए साल के दिन के टेस्ट में तीसरे दिन का खेल समाप्त होने के बाद, भारतीय खिलाड़ियों ने मैच अधिकारियों से उनके साथ हुए दुर्व्यवहार के बारे में बात की और जब यह अगली सुबह खेल शुरू हुआ, तो उन्होंने अंपायरों को सतर्क कर दिया।

रहाणे ने खुलासा किया कि अंपायरों पॉल रीफेल और पॉल बॉल्सन ने खिलाड़ियों को ड्रेसिंग रूम में वापस जाने के लिए कहा था, अगर वे खेलना नहीं चाहते थे, तो लेकिन भारत ने टेस्ट मैच जारी रखने का निर्णय लिया। मैच दस मिनट के लिए स्थगित कर दिया गया था और खेल जारी रहने से पहले लोगों के एक समूह को स्टैंड से बाहर कर दिया गया था।

राहणे ने बताया, की हमारे साथ इस तरह का व्यवहार करने वालो लोगो को मैदान से बाहर कर दिया गया था। जब सिराज ने मेरे पास आकर उनकी शिकायत की, तो चौथे दिन एक दिन पहले गाली देने के बाद मैने अंपायर्स से कहा, की उन्हे कार्यवाई करने की जरूरत है, और तब तक हम नही खेलेंगे। अंपायरों ने कहा, की आप मैच को रोक नही सकते है।

अगर आप चाहे तो बाहर जा सकते है। हमने कहा, की हम यहां खेलने के लिए मौजूद है। नाकी ड्रेसिंग रूम जाकर बैठने के लिए आए है। और आप गलत व्यवहार करने वालो लोगो को यहां से बाहर करे। उस समय सिडनी में जो कुछ भी हुआ वह पूरी तरह से गलत था।