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IPL के सभी टीम मालिक हुए नाराज़, BCCI के इस फ़ैसले से गुस्से में फ्रेंचाइजी

आईपीएल की देखा देखी कई देशों में क्रिकेट लीग शुरू हो चुकी है। कुछ देशों में शुरू होने वाली है। हालाकि आईपीएल जैसी सफलता किसी दूसरी लीग को मिल पाना बेहद कम उम्मीदें है।

इसके बहुत से कारण है, लेकिन एक बड़ा कारण बीसीसीआई का वो फैसला है, जो इन सभी लीग को लोकप्रियता और कमाई की ऊंचाई को छूने से रोकता है।

दोस्तो ये फैसला का भारतीय खिलाड़ियों का इन लीग में ना खेलना। दुनिया भर के दिग्गज खिलाड़ी आईपीएल में हिस्सा लेते है। लेकिन भारतीय खिलाड़ी कही और नही जाते। ये फैसला अब आईपीएल फ्रेंचाइजी को खलने लगा है।

दरअसल आईपीएल फ्रेंचाइजी के मालिकों ने पिछले 15 सालो मे भारतीय लीग ने अपनी सफलता को भुनाते हुए दूसरी लीग में भी अपने ब्रांड और फ्रेंचाइजी को विस्तार देने की पहल शुरू कर दी है।

कैरेबियन प्रीमियर लीग में पिछले 3.4 साल से ये जारी है, और अब क्रिकेट साउथ अफ्रीका और यूएई की टी20 लीग में भी पैर पसार लिए गए है।

ऐसे में फ्रेंचाइजी मालिक ये उम्मीद कर रहे थे, की आईपीएल में खेलने वाले या कोचिंग में हिस्सा लेने वाले उनके भारतीय खिलाड़ियों को भी इसमें शामिल किया जाए। लेकिन बाद में बीसीसीआई ने मना कर दिया।

सीएसए टी20 लीग में सीएसके अपनी फ्रेंचाइजी के लिए आईपीएल में सीएसके के दिग्गज कप्तान एमएस धोनी को बतौर मेंटोर ले जाना चाहती थी। लेकिन बीसीसीआई ने साफ कह दिया की ऐसा नही हो सकता।

इसके लिए धोनी को आईपीएल से भी सन्यास लेना होगा। भारतीय बोर्ड का ये फैसला अब फ्रेंचाइजी मालिको को चुभ रहा है। इनसाइड स्पोर्ट्स की एक खबर के अनुसार एक रिपोर्ट में फ्रेंचाइजी के अधिकारी में बताया था।

उन्होंने कहा था, की अभी तक हमे बीसीसीआई ओर से आधिकारिक तौर पर इसके जवाब का इंतजार है। हमे जो भी पता चला है, वो मीडिया रिपोर्ट्स के जरिए आया है। अगर ये सच है, तो बीसीसीआई का ये बर्ताव बिल्कुल गलत और अतार्किक है।

अधिकारी ने आगे कहा, की हम अपने स्पोर्ट स्टाफ और इकोसिस्टम को इन विदेशी योजनाओं में इस्तेमाल कर सकते है। अगर बीसीसीआई इसे रोकती है, तो ये बिलकुल सही नही होगा।

2008 में आईपीएल की शुरुवात के बाद जब दूसरे देशों में भी ऐसी फ्रेंचाइजी लीग शुरू होने लगी तो बीसीसीआई ने पहले ही साफ कर दिया था, की भारतीय खिलाड़ियों को किसी भी क्षमता में इन लीग में शामिल होने के लिए भारतीय क्रिकेट से पूरी तरह सन्यास लेना होगा।

जिसमे सिर्फ इंटरनेशनल क्रिकेट या घरेलू क्रिकेट ही नही बल्कि आईपीएल में शामिल है। और ये नियम भारतीय टीम के अनुबंधित खिलाड़ियों से लेकर घरेलू खिलाड़ियों पर भी लागू होता है, जिसकी अच्छी खासी आलोचना होती रही है।